Wednesday, 17 October 2018

达沃斯论坛探讨落实气候行动

一年一度的世界经济论坛 ( )于今日在瑞士滑雪胜地达沃斯开幕。此次论坛将为各国政府和企业提供一个探讨如何将巴黎气候协议付诸实践的机会。

会议的召开适逢世界面临全球变暖威胁之际,世界经济论坛上周发布的一篇报告显示,粮食安全及气候变化是商业精英最关注的问题之一。

联合国气候大会主席克里斯蒂·菲格雷斯周三上午在世界经济论坛专题讨论会上说道:签订《巴黎气候协议》只是"容易的环节",现在的任务是加快世界能源体系转型的步伐。

政商两界领导人
齐聚一堂,恰逢石油价格滑落至近十年最低点,新兴经济体发展日益趋缓。石油、煤炭、铁矿石等主要大宗商品需求疲软、供应过剩的现状让各国政府再一次意识到,化石燃料和能源密集型自然资源将是一个越来越不确定的因素,并有可能危及未来的规划和预算。

三上午的专题讨论会就化石燃料价格走低将会在何种程度上阻碍可再生能源和电动汽车的发展进行了辩论。在最近的这次油价暴跌之前,可再生能源和电动汽车已经逐渐可以与化石燃料相抗衡。

年年底,随着汽油价格的下滑,美国电动汽车的销售出现停滞,而高油耗汽车的需求却大幅增长。

源专家表示,由于中国、欧盟和美国等国政府采取碳交易、税收等激励措施鼓励从汽油发动机和化石燃料发电向低碳转型。因此,长期来看,这些国家和地区对于石油和煤炭价格的下跌有足够的耐受力。

时,新技术带来的机遇日益显现,如大容量电池、蓄能设备、并网效率提升、自动化程度提高等。在达沃斯会议上,与会者思索“第四次工业革命”将会给劳动力、城市、以及能源生产和存储的方式带来怎样的影响。

保主义者常嘲讽达沃斯会议不过是那些只会夸夸其谈的全球精英们展示口才的地方。但除了联合国气候峰会,能让世界银行和联合国这种多边机构与世界最大的企业和数十名国家领导人就如何解决包括气候变化问题在内的全球性问题会谈的机会并不多。今年的会谈结果,仍需拭目以待。

Monday, 1 October 2018

कैमिकल जो ले सकता था लाखों की जान

सिंथेटिक प्रोजेस्टेरोन का इस्तेमाल मुहासों, अतिरिक्त और अनचाहे बालों की ग्रोथ रोकने के लिए भी किया जाता है. हालांकि बहुत से वैज्ञानिकों का तो ये भी कहना है
हमारे पूरे शरीर में एंड्रोजन रिसेप्टर मौजूद हैं, खास तौर से पसीना पैदा करने वाली और शरीर पर बाल उगाने वाली ग्रंथियों के नज़दीक तो एंड्रोजन रिसेप्टर सबसे ज़्यादा मौजूद होते हैं. इसीलिए बहुत सी महिलाओं को इन गोलियों के सेवन के बाद पसीना आने और अनचाहे बाल उगने की शिकायत होने लगती है. यही नहीं इस तरह के स्टेरॉयड दिमाग़ पर भी असर डालते हैं.
मर्दों में एंड्रोजन किशोरावस्था में पैदा होते हैं जिनका मक़सद है दिमाग को रिमॉडल करना. लड़कियों में भी इसी उम्र में मर्दों वाला हार्मोन टेस्टोस्टेरोन पैदा होता है. लेकिन उसकी मात्रा बहुत कम होती है. इस हार्मोन का काम शरीर के कुछ अंगों को सिकोड़ना और कुछ को बड़ा करना होता है.
प्रोफ़ेसर प्लेत्सर का कहना है कि गोलियों की शक्ल में हार्मोन निगलने के बुरे असर के बारे में कई पहलुओं से रिसर्च की गई लेकिन दिमाग पर इसका क्या असर पड़ता है इस पहलू पर आठ साल पहले ही रिसर्च शुरू हुई है. जबकि इन गोलियों का इस्तेमाल पिछले 50 वर्षों से हो रहा है.
कि इससे हार्मोन असंतुलित होने का ख़तरा बना रहता है.
रिसर्च में पाया गया कि जो महिलाएं एंड्रोजेनिक प्रोजेस्टेन वाली गोलियां खा रही थीं उनका शब्द ज्ञान कमज़ोर पड़ रहा था. वो नए शब्द नहीं सोच पा रही थीं. जबकि वो घूमती हुई चीज़ों को जल्दी नोटिस कर रही थीं. जबकि ऐसा मर्दों के संदर्भ में देखा गया है कि वो कुछ खास मौकों पर औरतों के मुकाबले कम बोलते हैं और अपने आस-पास के माहौल को जल्दी भांप लेते हैं.
इससे पता चलता है कि ऐसे हार्मोन वाली गोलियां खाने से कुछ हद तक महिलाओं का दिमाग मर्दों की तरह काम करने लगता है. में सामने आई रिसर्च बताती है कि हाल में सुधार के बाद जिस तरह की एंटी एंड्रोजेनिक प्रोजेस्टेन वाली गोलियां बाज़ार में उतारी गई हैं उनके नतीजे काफ़ी बेहतर हैं.
उनके इस्तेमाल से महिलाओं में मर्दाना बदलाव नहीं आते. लेकिन इनका भी दिमाग पर असर तो होता ही है. अगर लंबे वक़्त तक इनका सेवन किया जाए तो दिमाग के कुछ खास हिस्सों में फैलाव लगातार होता रहता है.
बहरहाल ओरल हार्मोन वाले कॉन्ट्रासेप्टिव हमारे बर्ताव और दिमाग पर कैसा असर डालते हैं इस पर रिसर्च जारी हैं. लेकिन इसे बीसवीं सदी की सबसे बड़ी क्रांति कहना ग़लत नहीं होगा.
ऐसे गर्भ निरोधकों ने महिलाओं को खुलकर सेक्सुअल लाइफ़ का मज़ा लेने का मौक़ा दिया है. हर चीज के अच्छे और बुरे दोनों पहलू होते हैं और किसी भी चीज़ की अति नुक़सान ही पहुंचाती है.
सना ने इस घटना को पुलिसकर्मियों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "न तो हम रुके हुए थे और न ही आपत्तिजनक अवस्था में थे. हमारी ओर से कोई उकसावा नहीं था मगर कॉन्स्टेबल ने गोली चला दी."
सना ख़ान ने पत्रकारों से कहा, "हम कार्यक्रम से निकले और सर ने कहा कि वह मुझे घर छोड़ देंगे. मक़दूमपुर पुलिस पोस्ट के पास बाईं ओर से दो पुलिसवाले कार के बराबर आकर चलने लगे. वे चिल्लाए- रुको. मगर सर गाड़ी चलाते रहे क्योंकि रात का समय था और उन्हें मेरी सुरक्षा की चिंता भी थी."
सना ने कहा, "तभी इनमें से एक कॉन्स्टेबल बाइक से उतरा और लाठी से गाड़ी पर वार करना शुरू कर दिया मगर सर ने कार नहीं रोकी. दूसरे ने गाड़ी को ओवरटेक किया और 200 मीटर आगे जाने के बाद सड़क के बीच में बाइक रोक दी और हमें रुकने को कहा. हमारी कार कम गति से आगे बढ़ रही थी और फिर गाड़ी रोक दी. तभी कॉन्स्टेबल ने अपनी बंदूक़ निकाली और सामने से सर पर गोली चला दी. सर ने गाड़ी पर नियंत्रण खो दिया और वह आगे चलकर खंबे से टकराकर रुक गई. मैंने ट्रक ड्राइवरों को रोकने की कोशिश की. बाद में गाड़ी पर गश्त लगा रहे पुलिसकर्मियों ने हमें देखा और उनसे सर को अस्पताल ले जाने की गुज़ारिश की."
दरअसल संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात होने वाली थी मगर भारत ने पाकिस्तान की ओर से कश्मीरी चरमपंथी बुरहान वानी पर टिकट जारी करने और चरमपंथियों द्वारा जम्मू कश्मीर में पुलिसकर्मियों की हत्या के विरोध में इस वार्ता से किनारा कर लिया था.
इसके बाद सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से भी सुषमा स्वराज जल्दी निकल गई थीं.
पीटीआई की ख़बर के अनुसार न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में जब इस बारे में शाह महमूद कुरैशी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "अच्छा होता अगर हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते. लेकिन मैं उनके चेहरे पर बहुत ज्यादा तनाव देख पा रहा था. जब वह गईं, वह मीडिया से भी बात नहीं करना चाहती थीं. मैं दबाव साफ़ देख सकता था."
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत अपनी घरेलू राजनीति के कारण पाकिस्तान से बात नहीं कर रहा है.दौर में एक ऐसी फैक्टरी का पता चला है जहां ऐसा कैमिकल बनाया जा रहा था जो 40-50 लाख लोगों की जान ले सकता था.
डारेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने डीआरडीई के वैज्ञानिकों की मदद से इस अवैध फैक्ट्री से 9 किलोग्राम फेंटानिल कैमिकल ज़ब्त किया है.
ये अवैध लैब अमरीका से नफ़रत करने वाला एक पीएचडी स्कॉलर कैमिस्ट चला रहा था.
पहली बार भारत से इस कैमिकल को ज़ब्त किये जाने की घटना सामने आई है. ये कैमिकल अगर त्वचा के माध्यम से शरीर में चला जाए या ग़लती से भी सूंघ लिया जाए तो इसकी 2 मिलिग्राम डोज़ ही जानलेवा साबित हो सकती है.