सिंथेटिक प्रोजेस्टेरो
न का इस्तेमाल मुहासों, अतिरिक्त और अनचाहे बालों
की ग्रोथ रोकने के लिए भी किया जाता है. हालांकि बहुत से वैज्ञानिकों का तो
ये भी कहना है
हमारे पूरे शरीर में एंड्रोजन रिसेप्टर मौजूद हैं, खास तौर से पसीना
पैदा करने वाली और शरीर पर बाल उगाने वाली ग्रंथियों के नज़दीक तो एंड्रोजन
रिसेप्टर सबसे ज़्यादा मौजूद होते हैं. इसीलिए बहुत सी महिलाओं को इन
गोलियों के सेवन के बाद पसीना आने और अनचाहे बाल उग
ने की शिकायत होने लगती है. यही नहीं इस तरह के स्टेरॉयड दिमाग़ पर भी असर डालते हैं.
मर्दों
में एंड्रोजन किशोरावस्था में पैदा होते हैं जिनका मक़सद है दिमाग को
रिमॉडल करना. लड़कियों में भी इसी उम्र में मर्दों वाला हार्मोन
टेस्टोस्टेरोन पैदा होता है. लेकिन उसकी मात्रा बहुत कम होती है. इस
हार्मोन का काम शरीर के कुछ अंगों को सिकोड़ना और कुछ को बड़ा करना होता
है.
प्रोफ़ेसर प्लेत्सर का कहना है कि गोलियों की शक्ल
में हार्मोन निगलने के बुरे असर के बारे में कई पहलुओं से रिसर्च की गई लेकिन दिमाग पर इसका क्या असर पड़ता है इस पहलू पर आठ साल पहले ही रिसर्च शुरू हुई है.
जबकि इन गोलियों का इस्तेमाल पिछले 50 वर्षों से हो रहा है.
कि इससे हार्मोन असंतुलित होने का ख़तरा बना रहता है.
रिसर्च में पाया गया कि जो महिलाएं एंड्रोजेनिक प्रोजेस्टेन वाली
गोलि
यां खा रही थीं उनका शब्द ज्ञान कमज़ोर पड़ रहा था. वो नए शब्द नहीं
सोच पा रही थीं. जबकि वो घूमती हुई चीज़ों को जल्दी नोटिस कर रही थीं. जबकि
ऐसा मर्दों के संदर्भ में देखा गया है कि वो कुछ खास मौकों पर औरतों के
मुकाबले कम बोलते हैं और अपने आस-पास के माहौल को जल्दी भांप लेते हैं.
इससे पता चलता है कि ऐसे
हार्मोन वाली गोलियां खाने से कुछ हद तक महिलाओं का दिमाग मर्दों की तरह काम करने लगता है. में सामने आई रिसर्च बताती है कि हाल में सुधार के बाद जिस तरह की एंटी
एंड्रोजेनिक प्रोजेस्टेन वाली गोलियां बाज़ार में उतारी गई हैं उनके नतीजे
काफ़ी बेहतर हैं.
उनके इस्तेमाल से महिलाओं में मर्दाना बदलाव नहीं
आते. लेकिन इनका भी दिमाग पर असर तो होता ही है. अगर लंबे वक़्त तक इनका
सेवन किया जाए तो दिमाग के कुछ खास हिस्सों में फैलाव लगातार होता रहता है.
बहरहाल ओरल हार्मोन वाले कॉन्ट्रासेप्टिव हमारे बर्ताव और दिमाग पर
कैसा असर डालते हैं इस पर रिसर्च जारी हैं. लेकिन इसे बीसवीं सदी की सबसे बड़ी
क्रांति कहना ग़लत नहीं होगा.
ऐसे गर्भ निरोधकों ने महिलाओं को
खुलकर सेक्सुअल लाइफ़ का मज़ा लेने का मौक़ा दिया है. हर चीज के अच्छे और
बुरे दोनों पहलू होते हैं और किसी भी चीज़ की अति नुक़सान ही पहुंचाती है.
सना ने इस घटना को पुलिसकर्मि
यों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा, "न तो
हम रुके हुए थे और न ही आपत्तिजनक अवस्था में थे. हमारी ओर से कोई उकसावा
नहीं था मगर कॉन्स्टेबल ने गोली चला दी."
सना ख़ान ने पत्रकारों से
कहा, "हम कार्यक्रम से निकले और सर ने कहा कि वह मुझे घर छोड़ देंगे.
मक़दूमपुर पुलिस पोस्ट के पास बाईं ओर से दो पुलिसवाले कार के बराबर आकर
चलने लगे. वे चिल्लाए- रुको. मगर सर गाड़ी चलाते रहे क्योंकि रात का समय था
और उन्हें मेरी सुरक्
षा की चिंता भी थी."
सना ने कहा, "तभी इनमें
से एक कॉन्स्टेबल बाइक से उतरा और लाठी से गाड़ी पर वार करना शुरू कर दिया
मगर सर ने कार नहीं रोकी. दूसरे ने गाड़ी को ओवरटेक किया और 200 मीटर आगे
जाने के बाद सड़क के बीच में बाइक रोक दी और हमें रु
कने को कहा. हमारी कार कम गति से आगे बढ़ रही थी और फिर गाड़ी रोक दी. तभी कॉन्स्टेबल ने अपनी
बंदूक़ निकाली और सामने से सर पर गोली चला दी. सर ने गाड़ी पर नियंत्रण खो
दिया और वह आगे चलकर खंबे से टकराकर रुक गई. मैंने ट्रक ड्राइवरों को रोकने
की कोशिश की. बाद में गाड़ी पर गश्त लगा रहे पुलिसकर्मियों ने हमें देखा
और उनसे सर को अस्पताल ले जाने की गुज़ारिश की."
दरअसल संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर भारत और पाकिस्तान के विदेश
मंत्रियों की मुलाक़ात होने वाली थी मगर भारत ने पाकिस्तान
की ओर से कश्मीरी चरमपंथी बुरहान वानी पर टिकट जारी करने और चरमपंथियों द्वारा जम्मू
कश्मीर में पुलिसकर्मियों की हत्या के विरोध में इस वार्ता से किनारा कर
लिया था.
इसके बाद सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से भी सुषमा स्वराज जल्
दी निकल गई थीं.
पीटीआई
की ख़बर के अनुसार न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में जब इस बारे में शाह
महमूद कुरैशी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "अच्छा होता अगर हम
एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते. लेकिन मैं उनके चेहरे पर बहुत ज्यादा तनाव
दे
ख पा रहा था. जब वह गईं, वह मीडिया से भी बात नहीं करना चाहती थीं. मैं
दबाव साफ़ देख सकता था."
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत अपनी घरेलू राजनी
ति के कारण पाकिस्तान से बात नहीं कर रहा है.दौर में एक ऐसी फैक्टरी का पता चला है जहां ऐसा कैमिकल बनाया जा रहा था जो 40-50 लाख लोगों की जान ले सकता था.
डारेक्टरेट
ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने
डीआरडीई के वैज्ञानिकों की मदद से इस अवैध
फैक्ट्री से 9 किलोग्राम फेंटानिल कैमिकल ज़ब्त किया है.
ये अवैध लैब अमरीका से नफ़रत करने वाला एक पीएचडी स्कॉलर कै
मिस्ट चला रहा था.
पहली
बार भारत से इस कैमिकल को ज़ब्त किये जाने की घटना सामने आई है. ये कैमिकल
अगर त्वचा के माध्यम से शरीर में
चला जाए या ग़लती से भी सूंघ लिया जाए तो
इसकी 2 मिलिग्राम डोज़ ही जानलेवा साबित हो सकती है.